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यथार्थ
 
 
 
Contact Person : Roli Shukla
 
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यथार्थ
     भौतिकतावाद के पाश में जकड़ी हुयी आज की युवा पीढ़ी इतनी दूर निकल पड़ी है कि यथार्थवाद में आने में उसे शायद बहुत समय लग जायेगा । इसे हम आजकल के आधुनिक रहन-सहन का नतीजा माने, पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव का या फिर युवा-पीढ़ी के नये दृष्टिकोण या सोच का, कारण चाहे कुछ भी हो किन्तु ये बात खुल कर सामने आ रही है कि भौतिकता ने युवाओं को इतना कस कर जकड़ रखा है कि वो उससे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं । आधुनिक परिवेश में आज परिवार के रहन-सहन के तरीके बदल गयें हैं । खान-पान और दिनचर्या पर भी इसका बहुत ज्यादा असर दिखाई पड़ता हैं । कालेज या आँफिस जाने की जल्दी में सुबह का नाश्ता या तो कैन्टीन में होता है या फिर गाड़ी चलाते वक्त । पानी की जगह आज कोक ने ले ली है । खाने को कोई समय निर्धारित नहीं है । यहाँ तक सोने, उठने और काम करने को वक्त भी तय नहीं हैं । इन सबका एक कारण कार्यगत तनाव भी है । आँफिस में बढ़ती हुई प्रतिद्वन्दिता खुद को साबित करने की होड़, ऊँचा उठने की चाह, दौड़ में सबसे आगे रहने की कामना ओर अधिक धन कमाने की लालसा भी कई कारण हो सकते है ।

     वो जमाने अब गये जब लोग प्रकृति के बहुत करीब थें । शान्त वातावरण में घूमना फिरना, सादा जीवन व्यतीत करना, सात्विक खाना खाना और आध्यात्म में रूचि रखना लोगो को अच्छा लगता था । समय के साथ - साथ परिवर्तन तो होता ही है और शायद वो आवश्यक भी है । किन्तु जो चिन्ताजनक बात है वो ये है कि आज युवाओं पर उनकी भौतिकतावादी सोच हावी होती जा रही है । धन कमाना आज उनके लिए सब कुछ हो गया है । हाँलाकि ये अच्छी बात है कि आज कल के युवा इतने जागरूक हो गये है कि वो किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते , उनके अन्दर अनेकों क्षमताये हैं कार्यकुशलता है, वो अपने आप को सिद्ध भी करते हैं । लेकिन अपनी भौतिक सोच के चलते उनके लिए अच्छे और बुरे में अन्तर कर पाना मुश्किल सा होता जा रहा हैं । हाँलाकि आज की युवा पीढ़ी सही और गलत की अपनी नयी परिभाषा बनाती दिख रही हैं ।

     अभिभावक होने के नाते, शिक्षिक होने के नाते या फिर एक अच्छा नागरिक होने के नाते ये हमारा कर्तव्य है कि हम उन युवाओं को जो पथ भ्रमित है उनका सही मार्गदर्शन करें । उनकी अच्छाईयों से उन्हें अवगत कराये, कमियाँ कम गिनाएँ । उन्हें समय दें, सहनशीलता रखे उनके व्यवहार को नियन्त्रित करने से पहले उनके प्रति अपना व्यवहार ठीक करें । उन्हें अहसास दिलाएँ कि आप उनके साथ हमेशा हैं । उनके सुख-दुख को साथ बाँटे, उनके अन्दर छिपी आध्यात्मिकता को जागृत करें । उन्हें आत्म-निर्भर होने के लिए प्रोत्साहित करें लेकिन साथ-साथ परिवार के महत्व को भी समझाये। उन्हें अच्छे और बुरे में अन्तर करने का महत्व बताएँ । आत्मनिर्भर और आत्म केन्द्रित होने में अन्तर होता है ये बात उन्हें समझायें । आज की युवा पीढ़ी आज की युवाशक्ति है इस शक्ति का सद्उपयोग होना परम आवश्यक हैं । हमें प्रयास करना होना कि इस युवा शक्ति के हाथ में हम विद्रोह की मशाल न पकड़ा के ज्ञान के दीपक को प्रज्जवलित करें । जिससे इस आधुनिक युग में भौतिकता का नहीं वरन शान्ति का प्रकाश हों ।
 
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