Home   |   Feedback   |   Contact
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
महाभारत
जिज्ञासा
गर्व
प्रश्न
संघर्ष
कटु सत्य
आनन्द की ओर
स्मृति
शान्ति
साक्षरता का प्रकाश
विवशता
स्वदेश
वन्दना
एंकाकी
प्रकृति और मानव जीवन
हस्त कौशल
आजादी
चेतावनी
अपूर्ण-सम्पूर्णता
घट और गुण
जीवन के रस
अनुज
आशा
प्रयास
नव वर्ष
तुच्छ प्रयास
गुरुदेव
तरु और मनु
लालसा
न्याय
कवि की पत्नियाँ
कवि का इन्टरव्यू
नश्वरता
गरीबी का सुख
चाल्र्स शोभराज
कल्पना और यथार्थ
वह होली
अस्तित्व
श्रद्धाजंलि
पहचान
मेरा जीवन
नारी शक्ति
जागृति
उददेश्य
द्धृष्टिकोण
बाल श्रम
यथार्थ
 
 
 
Contact Person : Roli Shukla
 
Email Id: info@rolishukla.co.in
 
 
तरु और मनु
हे मित्र जरा मेरी सुन लो
हमने किसका क्या बिगाड़ा है
क्षति पहुंचाते हैं नित्य हमें
मानव के खेल ये सारा है
हम उनको छाया देते हैं
फल-फूलों से भर देते हैं
फिर भी न जाने किस कारण, वह हमें
काट रख देते हैं
माना मानव में बुद्धि है
और मानव में है बड़ा ज्ञान
हम तो साधरण से पेड़
पर हममें भी होती है जान
मानव ने लिखा किताबों में
कि जीव-हत्या है महापाप
फिर भी हम जीवित पेड़ों को
क्यों देता वह शोक-सन्ताप
ईश्वर ने हमें बनाया है
जीवन का हमें भी है अधिकार
फिर मानव के हम प्रतिदिन क्यों सहते हैं अत्याचार
इस पर दूसरा मित्र बोला सज्जन का आभूषण है धैर्य
तुम किंचित शोक न करो मित्र,
अच्छा नहीं मानव से बैर
वन सम्पदा के आभाव में जब
मानव कदम उठायेगा
तो स्वयं उसका उठा कदम, पीछे लौट के आयेगा
तब पता चलेगा, सभी वृक्ष
उसके लिए थे वरदान
हे मित्र उसी दिन से सारे,
वृक्षों का बढ़ जायेगा मान।
 
Designed By : SriRam Soft Trade Solutions