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स्मृति
इस गहन अन्धकार में अपनी स्मरण शक्ति के प्रकाश से
उन स्मृतियों को स्मरण करने का
प्रयत्न कर रहा है मन
स्मृतियाँ कुछ धूमिल सी हो गयी है
बड़ी विचित्र है ये उलझन कि कुछ-कुछ याद आ रहा है
किन्तु सब धुंधला सा कुहासा सा लग रहा है
लोग प्रसन्न दिख रहे है, क्या ये भ्रम तो नहीं ?
स्मृति से वर्तमान का कोहरा छट रहा है
नहीं, ये तो सत्य है
किन्तु अतीत का
ये दृष्य आज का नहीं है ये है व्यतीत का
सभी हाथ में हाथ बाँधें एक साथ जा रहे है
अधंरों पर मुस्कुराहट है, सभी मिल कर एकता का गीत गा रहे है
किन्तु उस गीत का स्वर मेरी स्मृति के
पास आते-आते क्षीण होता जा रहा है
कारण है वर्तमान का कोलाहल जो उस मधुर
स्वर को दबाता जा रहा है
लोग उसकी अराधना कर रहे है
लेकिन लोगों ने उसका अलग-अलग नाम नहीं दिया है
सच कितनी सुखद स्मृति है
किन्तु ये रूकावट ये शोर कैसा
कुछ नहीं वर्तमान के खिड़की और दरवाजों
से मजहबी दंगों की आवाजें है
ये क्या उसने एक दुर्बल असहाय नेत्रहीन
व्यक्ति को सड़क पार कराने में सहायता की है
क्या ये वर्तमान है ? नहीं मैं तो भूल ही गयी कि ये सब तो मेरी स्मृतियाँ है
लोगों में भय नहीं है आतंक नहीं है, बस मानवता है
किन्तु वर्तमान में तो मात्र कर्कशता और दानवता है
पहले रक्त सस्ता नहीं था
किन्तु आज रक्त की नदियाँ बहती है
जिसमें जो जिसे चाहे डुबो दे
अरे ये वर्तमान की दीवारों पर धब्बे कैसे
ओह उस सस्ते पाने के जिसका रंग लाल है
और ये पुस्तकें कैसी ? आश्चर्यजनक इसमें
तो भ्रष्टाचार नाम का कोई शब्द नहीं है
क्या करू वर्तमान की पुस्तकें पढ़-पढ़ कर
भ्रष्टाचार का भयानक शब्द सुन-सुन कर मेरी आँखें और कान दोनों थक गये है
हम वर्तमान के किस मोड़ पर आके रूक गये है
दीपावली के दीपों से सारी दुनिया जगमगा रही है
पटाखों की ध्वनि कितनी जोर से आ रही है
ओह ये क्या, कानों से कुछ सुनाई नहीं दे रहा
क्योंकि वो धमाका वर्तमान के पटाखे का था
जो वास्तव में पटाखा नहीं एक बम था
अब तो मेरी स्मरण शक्ति और भी क्षीण होती जा रही है
फिर वही कोहरा छा रहा है, भय लग रहा है
कि इन सुखद स्मृतियों के बाद, फिर वही
भयानक वर्तमान आ रहा है
भस्म हो गयी मेरी वो सब स्मृतियाँ
जिनकी राख का ढेर वर्तमान ने अपने नीचे दबाया है
सोता हुआ हो तो उसे जगाया जाये
उसे क्या जगाये जो जागते हुये भी सोया है
हम जानते है कि वर्तमान का विषैला बीज किसने बोया है
किन्तु वर्तमान के विषय में मैं अब कुछ नहीं कहूंगी
बड़े यत्न से मैंने उन घावों को
अपनी स्मृतियों के जल से धोया है-2
 
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