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साक्षरता का प्रकाश
गली के किसी कोने में एक छोटा सा बच्चा खाता है, खेलता है, कूदता है
किन्तु न जाने क्यूँ पढ़ने से डरता है ?
या शायद उसे यही नहीं पता कि साक्षरता क्या है ?
क्या ये दोष वास्तव में उसका है ?
कागज, कलम, किताब ये सब उसके लिये अर्थहीन है
वो तो बस खेलकूद में ही लीन है
क्या ये हमारे लिए चिन्ताजनक बात नहीं है ?
या हम ये सोचे कि ये बात तो कुछ खास नहीं है
हम जानते हुए भी अनभिज्ञ बने है
ध्यान से देखे तो निरक्षरता के बादल वास्तव में बहुत घने है
हमें इन बादलों को साफ कर साक्षरता की धूप निकालनी होगी
प्रकाश में उन्हें रहने की आदत डालनी होगी
क्योंकि प्रकाश चाहे सूर्य का हो या शिक्षा का
उस पर सबका अधिकार होता है
शिक्षा से तो क्या बड़े क्या बच्चे सभी के व्यक्तित्व का श्रृंगार होता है
आज ये कार्य हम शिक्षित वर्ग को कर दिखाना है
शिक्षा का प्रकाश घर-घर तक पहुँचाना है
एक व्यक्ति यदि एक निरक्षर को
साक्षर कर दे, तो ये सबसे बड़ी पूजा है
इससे अच्छा कार्य कोई नहीं दूजा है
अपना थोड़ा सा समय दे कर हम ये उपकार कर सकते है
अशिक्षित हो शिक्षित होने का अधिकार दे सकते है
आओ हम उनके हाथों में कलम पकड़ाये
चलो पढ़ायें कुछ कर दिखाये-2
 
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