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प्रश्न
चुनाव आने ही वाले थे
पोस्टरों और बैनरों से दीवारें सजी थी
खम्भों पर प्रत्याशियों की तस्वीरें लगी थी
चारों ओर दलों की टोलियाँ शोर मचा रही थी
इसको मत दो उसको मत दो
यही चिल्ला रही थी
कि अचानक आमने-सामने दोनों दलों के लोग टकरा गये
समस्त जन यह देख कर घबर गये
कि अब क्या होगा
एक ने पथराव किया
तो दूसरे ने भी ईंट का जवाब पत्थर से ही दिया
हिंसा हुयी
संकेत पर एक गोली चली और एक मर गया
कुछ घायल हुये
घटना से चारों ओर भय फैल गया
और उनके दल के प्रत्याशी ने मात्र शोक
व्यक्त किया
दूसरे दिन श्वेत वस्त्र पहन के
नेताओं वाला दुशाला डाल के
वो मत याचना हेतु निकल पड़ा
उसके बँधे हाथ और शालीनता वास्तव में कृत्रिम थे
पर बेचारी जनता को आजकल प्राकृतिक
चीजो पर विश्वास ही कहाँ रह गया है
उसने एक किसान से पूछा आपकी समस्या ?
हुजूर एक टयूबवेल हो जाता तो
जरूर-जरूर वोट दोगे तो सब कुछ होगा
पर उसे क्या पता ये सब है एक धोखा
गाँव में बिजली नहीं है हुजूर
वोट दोगे तो आ जायेगी जरूर
,कुछ श्रमिकों ने कहा हमारी दिहाड़ी के बारे में कुछ सोचा
वोट दोगे तो सारा काम होगा
कुछ महिलाओं ने कहा हमारे बच्चों के लिए कोई स्कूल नहीं है
वोट दोगे स्कूल भी होगा सही है
जनता की आँखों में विश्वास की लहर है
उन्हें क्या पता, वो सब बनावट की नहर है ।
जो वो गाँव में बहा रहा है
अन्त में वो अपनी नेताओं वाली शैली में एक वृद्धा के पास जा के कुछ कहने ही वाला था
कि वो पहले ही बोल उठी - वोट दूंगी मेरा काम करोगे ?
झूठे आत्मविश्वास की जर्जर डाली का सहारा ले कर उसने हाँ कर दी
तो ठीक है मुझे मेरा बेटा वापस कर दो जो चुनाव में जीत गया है ।
सभी हंस दिये ।
चुनाव अभी हुआ नहीं कोई जीता कैसे ?
क्यों ईश्वर ने उसे चुन लिया है
वो चुनाव में सफल हुआ है
मैं भी उसकी सफलता की प्रसन्नता बाँटूंगी ।
बोलो दोगे ?
ल्ज्जा से उसका और उसके शुभचिन्तकों का सिर झुक गया
उस वृद्धा का ये प्रश्न उनके कठोर हृदय में शूल के समान धँस गया
सबको वही हादसा याद आ गया
सारी जनता स्तब्ध रह गयी
ओर इस बात को भी समझ गयी
कि भी निमर्म व्यक्ति, देश को निर्ममता से ही चलायेगा
जब चुनाव के पहले एक को मरवाया है
तो नेता बनने के बाद न जाने कितनों को मरवायेगा-2
 
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