Home   |   Feedback   |   Contact
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
महाभारत
जिज्ञासा
गर्व
प्रश्न
संघर्ष
कटु सत्य
आनन्द की ओर
स्मृति
शान्ति
साक्षरता का प्रकाश
विवशता
स्वदेश
वन्दना
एंकाकी
प्रकृति और मानव जीवन
हस्त कौशल
आजादी
चेतावनी
अपूर्ण-सम्पूर्णता
घट और गुण
जीवन के रस
अनुज
आशा
प्रयास
नव वर्ष
तुच्छ प्रयास
गुरुदेव
तरु और मनु
लालसा
न्याय
कवि की पत्नियाँ
कवि का इन्टरव्यू
नश्वरता
गरीबी का सुख
चाल्र्स शोभराज
कल्पना और यथार्थ
वह होली
अस्तित्व
श्रद्धाजंलि
पहचान
मेरा जीवन
नारी शक्ति
जागृति
उददेश्य
द्धृष्टिकोण
बाल श्रम
यथार्थ
 
 
 
Contact Person : Roli Shukla
 
Email Id: info@rolishukla.co.in
 
 
महाभारत
यदि हम ध्यान से देखें तो हमारा जीवन भी महाभारत के पात्रों के इर्द -गिर्द घूमता प्रतीत होगा
जो कुछ हम है वो हम सदा बने रहेगें इसलिए हमारे अन्तर में भी एक महाभारत होगा
हममें भीष्म जैसी प्रतिज्ञा करने की क्षमता तो है
किन्तु हम उसे घृतराष्ट्र जैसी महत्वाकांशा से नष्ट कर देते है
अपनी शिष्ट प्रतिज्ञा को एक भ्रष्ट रूप दे देते है
हममें कुन्ती जैसा धैर्य तो है
किन्तु हम उसे गांधारी जेसी विवशता से तोड़ देते है
उस धैर्य के पथ को विवशता की ओर मोड़ देते हे
हममें द्रोण जैसी विद्या तो है
किन्तु हम उसे परशुराम जैसे क्रोध से भंग कर देते है
विद्या जैसी अमूल्य वस्तु को क्रोध की अग्नि के संग कर देते है
हममें एकलव्य जैसा शौर्य तो है
किन्तु हम उसे कर्ण जैसी धर्म प्रतिकूल मित्रता के साथ रख उसे नष्ट कर देते है
दूसरों को दुख दे कर स्वंय भी कष्ट में रह लेते है
हममें युधिष्ठिर जैसा धर्मज्ञान तो है
किन्तु हम कौरवों की भाँति अर्धमी बन जाते है
धर्मज्ञान होते हुए भी अधर्म में रम जाते है
हममें भीम जैसा बल तो है,
किन्तु हम उसे दुर्योधन जैसे अभिमान के कन्धे पर रख के प्रयोग करते है
बल और अभिमान कभी साथ-साथ नहीं चलते है
हममें अर्जुन, नकुल, सहदेव जैसी शक्ति तो है
किन्तु हम उस पर दुःशासन जैसी दुष्टता की प्रत्यन्या चढ़ा कर वाण चलाते है
अन्त मे प्राण आखिर हमारे ही जाते है
हममें विदुर जैसा नीतिज्ञान तो है किन्तु हम उसमें परिवर्तन कर उसे अनीति बना देते है
कहते है नीति विदुर की ही है
आरम्भ में बस ‘अ‘ लगा देते है
हम श्री कृष्ण जैसे राजनीतिज्ञ भी है
किन्तु हम उसे शकुनि की कूटनीति पर चलाते है
अन्त में होता ये है कि अपनी ही राजनीति से हम स्वंय हार जाते है
यदि हम चाहते है कि फिर से कुरूक्षेत्र मे महाभारत न हो
तो हमें सत्य और धर्म का पालन करना होगा
अन्यथा इस आधुनिक काल के वही पुराना महाभारत का युद्ध अवश्य होगा ।
 
Designed By : SriRam Soft Trade Solutions