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अपूर्ण-सम्पूर्णता
कोई भी राष्ट्र आधा नही वरन् पूर होता है
यदि ऐसा न होता तो वो राष्ट्र ही न कहलाता
टुकड़ो में बँटा वो देश आधा ही रह जाता
राष्ट्र को राष्ट्र बनाती है उसकी समपूर्णता और
भारत की अनेकता मे एकता है उसकी सबसे बड़ी विशेषता
जो वास्तव में उसे एक सम्पूर्ण राष्ट्र बनाती है
किन्तु क्या ये सम्पूर्णता सम्पूर्ण है ?
प्रश्न बहुत ही कठिन है
और इस प्रश्न का उत्तर देना उससे भी अधिक जटिल है
आज का भारत वो नहीं है जो पहले कभी रह चुका है
कारण है उसकी सम्पूर्णता में कई विघ्न बाधाएँ आ रही है
जो उसे सम्पूर्ण नहीं होने देती
उत्तर यही स्पष्ट हो जाता है
कि भारत के सम्पूर्ण होने में थोड़ा सा कुछ रह जाता है
भारत जैसे प्रजातन्त्र देश में साम्प्रदायिकता के दंगे
भारत जैसी पवित्र भूमि पे भ्रष्टाचार
और भारत जैसे शान्तिप्रिय देश में आतंकवाद
कितनी आश्चर्यजनक है ये बात
घर का अच्छा होना उसके आकार पर नहीं
उसमें रहने वाले सदस्यों पर निर्भर करता है
घर में रहने वाले सदस्यों मे ही अगर फूट हो तो वो भला किसे अच्छा लगता है
कि एक ही घर के होकर हम अपने अलग-अलग घर माँगते है
अलग होने पर उन बेटों का तो कुछ नहीं होगा
होगा तो उस माँ का जिसका हृदय सदा के लिए टूट जायेगा
होगा तो उस घर का जिसका आकार और अस्तित्व बिगड़ जायेगा
आज एक अलग हुआ है कल और अलग होगें और परसों तो पता नहीं क्या होगा
सुबह जब आँख खुलेगी तो भारत अपनी जगह नहीं होगा
उसके स्थान पर होगा एक खण्डहर जो वास्तव मे खण्डहर भी न लगता होगा
और उसमें से किसी माँ के रूदन की ध्वनि सुनाई देगी जिसका अपना कोई न होगा
ये तो ईश्वर की कृपा है कि अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ
मैंने तो अपाको भविष्य के भयानक स्वप्न से अवगत करा दिया
कि सम्भव है आप इस वीभत्स दृश्य को नहीं देखना चाहेगे
शान्ति और सदभावना ही लाना चाहेगे
तो चल कर हमें ये शपथ लेनी होगी
कि भारत की सम्पूर्णता भारतवासियों
की एकता से ही सम्पूर्ण रहेगी
 
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