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आजादी
मेरे वतन के लोगों जरा पीछे मुड़ के देखो
सूनी सड़क मिलेगी जरा पास जा के देखो
कोई न वहाँ होगा, होगी तो बस खामोशी
बस एक बार उसकी तुम ध्वनि तो सुन के देखो
हो सकता है तुम पाओ वहाँ रक्त की छीटें
उस रक्त लालिमा को पहचान के तो देखो
टूटी हुयी मिलेगी कुछ तुमको चूड़ियाँ भी
उन काँच के टुकड़ो को हाथों मे ले के देखो
आगे बढ़ो मिलेगी धरती पे पड़ी राखी
उस रक्षा के सूत्र को तुम कलाई पे रख के देखो
आगे सुनाई देगा इस देश राग का स्वर
बस एक बार उसको मुख से तो गा के देखो
देखो फहर रहा हैं वो ध्वज लहर-लहर के
जरा उसके पास जा के मस्तक नवा के देखो
रूक जाओ अब ये सोचो कैसे मिली आजादी
पाने के लिए जिसको लोगों ने जान दे दी
सूनी सड़क पर ही थी वीरों की वो खामोशी
और रक्त की छीटों में थोड़ी मिली बेहोशी
वो चूड़ी और वो राखी बहनों की थी निशानी
सब कुछ लुटा जिन्होने न हार कभी मानी
इस देश राग का स्वर, कहीं क्षीण हो न जाये
उस ध्वज का वो कहरना कहीं फिर से रूक न जाये
तो उससे पहले आओ हम आज कसम खाये
कि मिल के हम रहेगें चाहे भी जो हो जाये
कि फिर हमारे देश में परतन्त्रता न आये
 
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